त्रिकुटा पर्वत जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित हिमालय की एक पवित्र पर्वत श्रृंखला है। इस पर्वत पर ही माता वैष्णो देवी का प्रसिद्ध भवन और पवित्र गुफा स्थित है। "त्रिकुटा" नाम का अर्थ है "तीन चोटियाँ" — जो इस पर्वत की तीन मुख्य चोटियों को दर्शाता है।
पुराणों के अनुसार, त्रिकुटा पर्वत वह स्थान है जहाँ माता वैष्णो देवी ने भैरव नाथ से रक्षा पाई और गुफा में शरण ली। माता ने यहाँ 9 महीने तपस्या की और अंत में भैरव नाथ का संहार कर उसे मोक्ष दिया। यहीं से माता ने त्रिकुटा पर्वत को अपना स्थायी निवास बनाया।
पुराणों में उल्लेख है कि देवी भगवती ने त्रेता युग में अपनी बाल लीला यहीं की थी। राम लंका विजय से पहले माता के दर्शन के लिए आए थे और माता ने उन्हें विजय का आशीर्वाद दिया था।
"त्रिकुटा" — तीन शिखरों वाला पर्वत। इन तीन चोटियों का प्रतीकात्मक संबंध माता की तीन पिंडियों से भी माना जाता है:
5,200 फीट की ऊँचाई के कारण त्रिकुटा पर्वत का मौसम कटरा से अलग होता है। गर्मियों में भी यहाँ ठंडी हवाएं चलती हैं। सर्दियों में बर्फबारी होती है।
| मौसम | तापमान | यात्रा स्थिति |
|---|---|---|
| मार्च-जून | 10°C - 25°C | ✅ सर्वश्रेष्ठ |
| जुलाई-अगस्त | 15°C - 22°C | ⚠️ बारिश, सावधानी |
| सितंबर-नवंबर | 8°C - 20°C | ✅ उत्तम |
| दिसंबर-फरवरी | -5°C - 10°C | ❄️ बर्फबारी |