जहाँ माता के बाण से पवित्र जल निकला — यात्रा का प्रथम पवित्र पड़ाव
बाणगंगा माता वैष्णो देवी की यात्रा का पहला और अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव है। यह पवित्र स्थान कटरा से केवल 1.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और समुद्र तल से 2,805 फुट (855 मीटर) की ऊँचाई पर है। यहाँ माता ने अपने दिव्य धनुष से बाण चलाया था और पत्थर से पवित्र जल की धारा प्रकट हुई थी — इसी घटना के कारण इस स्थान का नाम बाणगंगा पड़ा।

जब माता वैष्णो देवी भैरव नाथ के पीछा करने से बचते हुए उत्तर दिशा में त्रिकुटा पर्वत की ओर बढ़ रही थीं, तब उन्हें और उनके अनुचर लंगूर वीर को प्यास लगी। उस क्षेत्र में कोई जलस्रोत नहीं था। माता ने अपना दिव्य धनुष उठाया और पर्वत पर एक बाण चलाया।
जहाँ बाण लगा, वहाँ से पवित्र शीतल जल की धारा फूट पड़ी। माता और लंगूर वीर ने उस जल से प्यास बुझाई। माता ने यहाँ स्नान भी किया और पूजा-अर्चना की। इस प्रकार बाणगंगा नाम पड़ा — बाण (तीर) + गंगा (पवित्र नदी)।
यात्रा आरंभ करने से पहले बाणगंगा में स्नान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि:

बाणगंगा का जल हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं से निकलता है। यह जल प्राकृतिक खनिजों से भरपूर है जो शरीर को स्वस्थ रखते हैं। पर्वतीय जल होने के कारण यह बेहद शीतल और स्वच्छ होता है। वैज्ञानिक दृष्टि से भी इस जल का सेवन लाभदायक माना गया है।
बाणगंगा में स्नान के बाद भक्त मंदिर में जाकर माता का दर्शन और आशीर्वाद लेते हैं। फिर वे पोनी, पालकी या पैदल यात्रा शुरू करते हैं। यहाँ से यात्रा आरंभ होती है — चरण पादुका की ओर।
🙏 जय माता दी! बाणगंगा की महिमा अपार है! 🙏