वह पवित्र शिला जहाँ माता वैष्णो देवी के चरण चिह्न आज भी अंकित हैं
चरण पादुका माता वैष्णो देवी की यात्रा का दूसरा पवित्र पड़ाव है। यह स्थान कटरा से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और बाणगंगा से आगे पड़ता है। यहाँ एक विशाल प्राकृतिक शिला (चट्टान) पर माता वैष्णो देवी के चरण-चिह्न अंकित हैं। ये चरण-चिह्न किसी मानवीय कारीगरी से नहीं बने — ये स्वयंभू हैं, अर्थात् स्वतः प्रकट हुए हैं।

जब माता वैष्णो देवी भैरव नाथ से बचते हुए बाणगंगा से आगे बढ़ रही थीं, तब उन्होंने इस स्थान पर थोड़ी देर के लिए विश्राम किया। वे एक विशाल शिला पर बैठ गईं और ईश्वर का ध्यान करने लगीं। जब वे उठकर आगे बढ़ीं, तो उनके चरण-चिह्न उस शिला में अंकित हो गए।
यह कोई साधारण घटना नहीं थी। शास्त्रों में कहा गया है कि जब कोई दिव्य शक्ति किसी स्थान पर चरण रखती है, तो वह स्थान सदा के लिए पवित्र हो जाता है और वहाँ की मिट्टी, पत्थर, जल — सब कुछ दिव्य हो जाता है।
चरण पादुका पर एक भव्य मंदिर निर्मित है जहाँ माता के चरण-चिह्नों की विधिवत पूजा होती है। मंदिर परिसर में:

शास्त्रों में उल्लेख है कि भगवान के चरण-दर्शन से भक्त के सभी पाप नष्ट होते हैं और उसे मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। माता के चरण-पादुका के दर्शन से:
चरण पादुका पर खड़े होकर भक्त को एक अद्भुत अनुभव होता है। पर्वत की शांत वादियाँ, ठंडी हवा, पक्षियों की चहचहाहट और दूर से आती "जय माता दी" की ध्वनि — ये सब मिलकर एक ऐसा वातावरण बनाते हैं जो भक्त को सांसारिक चिंताओं से मुक्त कर देता है। इस स्थान पर बैठकर ध्यान करने से मन को असीम शांति मिलती है।
🙏 माता रानी के चरणों में नमन! जय माता दी! 🙏